बुधवार, 16 सितंबर 2020

जयपुर यात्रा

 जयपुर दर्शन







गुलाबी नगर

आज चलते हैं ऐसी यात्रा पर एक ऐसा शहर जिसे जाना जाता है गुलाबी नगर के नाम से जो राजस्थान की राजधानी है इस शहर को आमेर के राजा सवाई जय सिंह (द्वितीय) ने बसाया था इस शहर की सभी इमारतों का रंग गुलाबी है जो पहले नहीं था सन 1876 मैं वेल्स के राजकुमार के आने के अवसर पर तत्कालीन महाराजा रामसिंह के आदेश पर इस शहर को गुलाबी कलर द्वारा आकर्षक रूप देने की कोशिश की गई तभी से इस शहर का नाम गुलाबी नगरी प्रसिद्ध हो गया इस शहर को सुरक्षित करने के उद्देश्य से चारों ओर से परकोटे का निर्माण करवाया गया है इस शहर को वास्तु के अनुरूप बसाया गया है जिसके सारे रास्ते सीधे और चौड़े है इस शहर के आराध्य हैं गोविंद देव जी 


 हवा महल

  सन 1799 में हवामहल का निर्माण करवाया गया था  यह पांच मंजिली इमारत अर्ध अष्टाकार रूप में बनाई गई है जिसमें 953  खिड़कियां हैं इन खिड़कियों से गुजरने पर हवा ऐसा एहसास देती है जैसे पंखा चल रहा है इस इमारत का निर्माण करवाने का उद्देश्य राजसी स्त्रियों को शहर का दैनिक जीवन और जुलूस दिखाने का था






 

गोविंद देव जी 

 जयपुर का सबसे प्रसिद्ध भगवान कृष्ण का यह मंदिर बिना शिखर का है चंद्र महल के पूर्व में जय निवास के बगीचे के बीच में निर्मित है गोविंद देव जी जयपुर के संरक्षक देवता के रूप में यहां स्थित है गोविंद देव जी की मूर्ति पहले वृंदावन के एक मंदिर में स्थित थी फिर सवाई जयसिंह द्वितीय ने इन्हें यहां अपने परिवार के देवता के रूप में स्थापित किया था 








  जंतर मंतर 

 
 यह जयसिंह की पांच वेधशाला में से सबसे विशाल पत्थर की वेधशाला है इसको वैज्ञानिक ढंग से तैयार किया गया है इसके अंदर पत्थर के बहुत ही जटिल यंत्र है जिनका प्रयोग खगोलीय गणना के लिए किया जाता है इनमें सबसे अधिक प्रभावशाली राम यंत्र है जिसका प्रयोग ऊंचाई मापने के लिए किया जाता है यह वेधशाला विश्व प्रसिद्ध है इसे 2012 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर में शामिल किया था







 सिटी पैलेस

यह पूर्व शाही निवास है यह भूरे संगमरमर के स्तंभों पर टिकी इमारत है इसमें रंगीन पत्थरों पर फूलों की आकृति निर्मित की गई है इसमें एक संग्रहालय भी है जिसमें राजस्थानी और मुगलिया शैली के मिश्रण से तैयार पोशाके और हथियार सुसज्जित है इस के द्वार पर दो संगमरमर के नक्काशीदार हाथी विराजमान है 








गलता तीर्थ 

यह एक प्राचीन तीर्थ स्थल है इसका हरियाली से युक्त प्राकृतिक सौंदर्य इसे और अधिक आनंदमय बनाता है यह तीर्थ स्थल निचली पहाड़ियों के बीच में बना हुआ है यहां एक सूर्यदेव का छोटा मंदिर है जिसे पूरे शहर से देखा जा सकता है यहां पानी का कुण्ड बना हुआ है जिसमें प्राकृतिक रूप से पानी आता है इस कुण्ड में अमावस्या पर स्नान करने करने का बड़ा महत्व है 









आमेर का किला

मावठा झील के पास स्थित इस किले का निर्माण राजा मानसिंह सवाई जयसिंह द्वारा कराया गया है मावठा झील के पास से पैदल और हाथी पर सवार होकर सिंह पोल और जलेब चौक तक पहुंचा जा सकता है चौक से सीढ़ियां किले में स्थित शिला माता के मंदिर तक जाती है शीला माता राज परिवार की कुलदेवी है जिसकी पूजा हजारों श्रद्धालु करते हैं शिला माता की मूर्ति बांग्लादेश के जेसोर से यहां लाई गई थी
 






जल महल

जयपुर से आमेर जाने वाले मार्ग पर स्थित मानसागर झील के मध्य बना हुआ है यह महल,इसका निर्माण राजा जयसिंह ने करवाया था इसके कई तल पानी के अंदर बनाए गए हैं जिससे इस महल में गर्मी नहीं लगती है चांदनी रात में देखने पर झील के मध्य इस महल का दृश्य बड़ा ही मनमोहक लगता है 







रामनिवास बाग

रामनिवास बाग के अंदर चिड़ियाघर है जिसमें हर तरह के जानवर और पक्षी है इसके बाहरी और रामलीला मैदान है जिसमें रामलीला होती हैं और इसके अंदर सामने एक संग्रहालय है जिसका नाम अल्बर्ट हॉल है जिसमें एक ममी (एक बहुत पुरानी इंसानी लाश जिसे कुछ केमिकल युक्त पदार्थ लगा कर बहुत समय तक सुरक्षित रखा जाता है)रखी हुई है









वैसे तो जयपुर बहुत बड़ा है जिसकी संपूर्ण यात्रा वर्णन करना कठिन है हमने इस लेख में कुछ महत्वूर्ण जगहों का ही उल्लेख किया है आशा करते हैं आपको यह लेख अच्छा लगा होगा इसी शुभकामनाओं के साथ आपका हृदय से आभार व्यक्त करते हैं



ऐसी ही अन्य यात्रा वर्णन के लिए आप मेरी यादगार यात्रा पर आ सकते हैं।



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