शनिवार, 12 सितंबर 2020

महाकालेश्वर यात्रा

  जय श्री महाकाल




                                जय श्री महाकालेश्वर




आज की यात्रा शिप्रा नदी के तट पर बसे उज्जैनी की जिसे अवंतिका भी कहा जाता है जो नगरी है विक्रमादित्य की, जो नगरी है महाकाल की, जहां के राजा है महाकाल उज्जैन नगरी देश के प्रमुख नगरों से रेलवे द्वारा जुड़ी हुई है उज्जैन रेलवे स्टेशन से लगभग 1.5 किलोमीटर दूर है मंदिर महाकाल का जहां की भस्म आरती पूरे विश्व में प्रसिद्ध है इस मंदिर को सन 1235 में इल्तुतिश द्वारा विध्वंस करने का प्रयास किया गया था







उज्जैन रेलवे स्टेशन 




महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग 



उज्जैन के राजा स्वयं महाकाल है इसलिए यहां पर कोई राजा या नेता रात को रुक नहीं सकता स्वयं विक्रमादित्य भी रात को यहां नहीं रुकते थे बाबा महाकाल कि जब सवारी निकलती है तो पुलिस टुकड़ी उन्हें सलामी देती है पूजन के बाद कलेक्टर और पुजारी बाबा महाकाल को नगर भ्रमण करवाते हैं यह सवारी विशेष अवसरों पर ही निकलती है 12 ज्योतिर्लिंगों में से यही 1 ज्योतिर्लिंग दक्षिण मुखी है इसलिए इस ज्योतिर्लिंग का बहुत ज्यादा महत्व है 






 भस्म आरती



पूरे विश्व में यही एक ऐसा स्थान है जहां बाबा का श्रृंगार भस्म से किया जाता है भस्म आरती सुबह 4:00 बजे होती है भस्म आरती के समय बहुत भीड़ होती है भस्म आरती के लिए ऑनलाइन बुकिंग पहले से करवानी पड़ती है भस्म आरती के लिए महिलाओं को साड़ी और पुरुष को सिर्फ एक धोती पहनना अनिवार्य है आप यहां से भस्म आरती की ऑनलाइन बुकिंग कर सकते है, 






भस्म आरती दर्शन 






महाकालेश्वर मंदिर दैनिक पूजा समय




आरती         चैत्र से अश्विन तक         अश्विन से फाल्गुन तक 
                                                                                    भस्म आरती      प्रात:4 बजे                     प्रात:4 बजे    

द्धयोदन            प्रात: 7 बजे                    प्रात: 7 बजे 
 
महा भोग          प्रात: 10 बजे                  प्रात: 10 बजे

संध्या               सांय.5 बजे                     सांय.5 बजे

पुन: संध्या        सांय 7:00 बजे               सांय 7:00 बजे

शयन                रात्री 11 बजे                  रात्रि 11 बजे




नोट_श्रावण मास में भस्म आरती प्रातः 3:00 बजे होती है 





मंगल नाथ मंदिर 



महाकाल मंदिर से लगभग 5 किलोमीटर दूर है मंगल नाथ मंदिर जहां मंगल ग्रह की शांति की पूजा होती है मंगल ग्रह का मानव जीवन से गहरा नाता है मनुष्य की कुंडली में मांगलिक दोष होता है उसकी विशेष पूजा यहां होती है जिसमें पके हुए चावल से पींड बनाकर पूजा की जाती है 




मंगल नाथ दर्शन 




काल भैरव मंदिर



मंगलनाथ मंदिर से थोड़ी दूर स्थित है काल भैरव मंदिर जहां बाबा भैरव मदिरापान करते हैं यहां मदिरा चढ़ाने वाले भक्तों की मनोकामना अवश्य ही पूरी होती है यहां बहुत राजाओं ने अपनी विजय के लिए मन्नते मांगी है और उनकी मन्नते पूरी भी हुई है यहां बाबा काल भैरव को मदिरापान करते हुए देखा जा सकता है जैसे ही मदिरा डाले हुए पात्र को बाबा के मुंह से लगाया जाता है वह पात्र खाली हो जाता है काल भैरव भगवान शिव का क्रोधित स्वरूप है यह मंदिर आश्चर्य चकित करने वाला है 






भैरव बाबा दर्शन  



रामघाट  



शिप्रा के तट पर बना रामघाट अत्यंत ही प्राचीन स्थान है यहां प्रभु श्री राम ने अपने पिता दशरथ जी का पिंडदान किया था यहां से बहने वाली शिप्रा नदी का दृश्य अत्यंत ही मनोरम है जिसका जल अमृत के समान है इसमें स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है पुराणों मेंउल्लेख है कि शिप्रा नदी भगवान विष्णु के शरीर से निकली है जन्म जन्म के पापों से मुक्त होने के लिए यहां स्नान करने का बड़ा महत्व है शाम के समय रामघाट पर होने वाली आरती का दृश्य बड़ा ही मन को मोह लेने वाला होता है 






रामघाट


 हरसिद्धि मंदिर 



 51 शक्तिपीठों में से एक है मां हरसिद्धि का मंदिर  जब भगवान शिव दक्ष प्रजापति के हवन कुंड से माता सती को लेकर जा रहे थे तब उज्जैन के इसी हरसिद्धि मंदिर की पावन जगह पर माता सती की कोहनी गिरी थी मां हरसिद्धि राजा विक्रमादित्य की कुलदेवी थी  इससे पहले मां हरसिद्धि समुंद्र के बीच एक टापू पर सुशोभित थी विक्रमादित्य माता को यहां लाना चाहते थे  विक्रमादित्य ने 11 बार अपना सिर काटकर माता को चढ़ाया था लेकिन हर बार माता की कृपा से सर वापस आ जाता था इससे प्रसन्न होकर माता ने यहां आने का वचन दिया था यहां माता का स्वरूप प्रसन्न मुद्रा में है यह मंदिर महाकालेश्वर मंदिर से 1 किलोमीटर दूर है 





मां हरसिद्धि दर्शन 




चिंतामन गणेश मंदिर 



महाकालेश्वर मंदिर से करीब 6 किलोमीटर दूर है चिंतामन गणेश जी का मंदिर जहां गणेश जी तीन रूप में विराजमान है चिंतामन इच्छा मन सिद्धिविनायक इस मंदिर की स्थापना स्वयं प्रभु श्रीराम ने की थी मनोकामना पूर्ति के लिए भक्त इस मंदिर की दीवार पर उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं और मन्नत का धागा बांधते हैं इच्छा पूर्ण होने पर दूध दही चावल और नारियल इन में से किसी एक चीज का दान किया जाता है




चिंतामन मंदिर दर्शन 



 आशा करते हैं आपक इस लेख की सभी जानकारी अच्छी लगी होगी
 इसी शुभकामनाओं के साथ आपका हृदय से आभार ।


ऐसे ही अन्य यात्रा वर्णन के लिए आप मेरी यादगार यात्रा पर विजिट कर सकते हैं 





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