जय मां वैष्णो देवी की
बहुत दिन से सोच रहे थे माता के दरबार जाने के लिए पर कोई संयोग नहीं बन रहा था वो कहते ह ना जिसको माता का बुलावा आता ह वोही भक्त मां के दरबार में दर्शन के लिए जा पाता ह तो ऐसा ही हुआ शायद माता का बुलावा अबकी बार हमारे लिए भी आ गया हम चार दोस्तों ने जाने का मन बनाया और हमने जाने कि तैयारी शुरू कर दी। बैग पैक किया और निकल गए ट्रेन की टिकट हमने पहले ही बुक कर दी थी जो कंफर्म थी जम्मू तवी एक्सप्रेस की जो जयपुर से शाम 4:00 बजे चलती है हम 3:00 बजे के करीब जयपुर जंक्शन पर पहुंच गए खाना हमने घर से पैक करवा लिया था 4:00 बजे हमारी ट्रेन चल चुकी थी ट्रेन में भीड़ भी खूब थी पर हमारी सीट कनफर्म थी तो हमे कोई परेशानी नहीं हुई हम बैठ गए अच्छा मज़ा आ रहा था ट्रेन में माता के जयकारे लग रहे थे
रात को 9 बजे हमने खाना खाया और थोड़ी देर बाद हम सो गए मौसम थोड़ा सर्दी का था तो हल्की फुल्की ठंड लग रही पर बहुत अच्छी नींद आयि जो सुबह 8 बजे हमारी नींद खुली जम्मू अभी आने वाला था फिर हाथ मुंह धोया थोड़ी देर में जम्मू तवी स्टेशन आ गया हम स्टेशन से बाहर निकले वहा से हमने कटरा के लिए प्राइवेट टैक्सी ले ली थी वैसे जम्मू से कटरा के लिए बस सेवा भी उपलब्ध ह रास्ता इतना घुमावदार और रोमांच से भरपूर था हम रास्ते का आनंद लेते हुए करीब 2 घंटे बाद कटरा पहुंचे वहा पर हम एक होटल में चले गए जो पहले से बुक किया था वैसे कटरा में रुपए 100 से 5000 तक प्रति व्यक्ति रुकने की व्यवस्था ह कटरा में 12 महीने फूल भीड़ रहती ह हमने होटल में आराम किया और शाम को 5 बजे हमने कटरा से माता के भवन जाने के लिए अपनी यात्रा शुरू की उससे पहले हमने यात्रा पर्ची काउंटर से यात्रा पर्ची ले ली थी
जो निशुल्क रहती ह फिर हम पैदल ही बाणगंगा चेक पोस्ट पर पहुंच कर पर्ची चेक करवा के आगे निकले बाणगंगा चेक पोस्ट वह जगह है जहां से माता के भवन की चढ़ाई स्टार्ट होती है हम तो पैदल ही जा रहे थे वैसे यहां से घोड़े खच्चर भी जाते हैं जो 1100 से 1500 रू में भवन तक पहुंचा देते ह इसके अलावा पालकी भी जाती ह जिसे 4 लोग लेकर चलते ह जिसका चार्ज 3 से 4 हजार तक हो सकता ह
आगे चलने पर एक प्राकृतिक मनोरम झरने से बहती हुई बाणगंगा नदी ह, कहते ह यहां माता ने अपने केश धोए थे वहा पर हमने स्नान किया झरने का पानी इतना शीतल था जैसे कह रहा था कि आगे कि यात्रा बहुत कठिन ह और यहां स्नान करने के बाद ही बिना थके आगे की यात्रा कर पाओगे फिर वहा से आगे चलने के बाद अर्धकुमारी का मन्दिर आया जिसे गर्भ जून की गुफा भी कहते हैं जहा मां वैष्णो देवी 9 महीने तक रही थी हम वहां थोड़ी देर रुके और विश्राम किया हमारी वहां दर्शन करने की इच्छा थी पर वहां पर बहुत लंबी लाइन लगती है तो टाइम ज्यादा निकल जाता इसलिए हम आगे के लिए निकल गए आगे खड़ी चढ़ाई थी जिसे हाथी माथे की चढ़ाई कहा जाता है ऊपर भवन के करीब पहुंचते-पहुंचते रात्रि 11 के लगभग बज गए थे तो हमने वहां पर रात्रि विश्राम करने का फैसला किया वहां पर श्राइन बोर्ड की बहुत सारी धर्मशालाएं होटल बगैरा है जहां कम से कम चार्ज में आप रह सकते हैं
यहां पर निशुल्क लॉकर रूम की व्यवस्था भी है जहां आप अपना कोई भी सामान रख सकते हैं फिर हमने खाना खाया और थोड़ा वहां पर घूमने के लिए निकल गए रात्रि में भवन की छटा देखने लायक थी और फिर हम सो गए और सुबह 5:00 बजे उठे और नहा धोकर तैयार हुए और भवन के बाहर से श्राइन बोर्ड की खूब सारी दुकानें वहां से हमने प्रसाद लिया और लंबी लाइन में लग गए करीब 1 घंटे बाद हमारा नंबर आया दर्शनों के लिए, हमने वहां माता के दर्शन किए जो पिंडी रूप में स्थापित है महाकाली महालक्ष्मी महासरस्वती यहां मां स्वयं पिंडी रूप में विराजमान है यहां मां स्वयं प्रकट हुई है भक्तों के संकट दूर करने के लिए और दुख हरने के लिए, सामान्यतः वैष्णो देवी को माता रानी और वैष्णवी के नाम से भी जाना जाता है

दर्शन करने के पश्चात हमें मां वैष्णो देवी के आशीर्वाद स्वरुप प्रसाद का पैकेट मिला जिसमें माता की फोटो लगी हुई सिक्के के साथ प्रसाद था दर्शन करने के पश्चात अति आनंद की अनुभूति हुई मानो सब कुछ मिल गया हो और किसी भी चीज की चाहत ना हो।अद्भुत है मां वैष्णो देवी का दरबार बोल सांचे दरबार की जय। वहां से हमने भैरव मंदिर के लिए यात्रा शुरू की मान्यता है कि भैरव मंदिर की यात्रा किए बिना माता वैष्णो देवी की यात्रा का पूर्ण फल नहीं मिलता है हमने भैरव मंदिर पैदल ही जाने का फैसला किया वैसे भवन से भैरव मंदिर तक रोपवे सर्विस शुरू की गई है जिसका किराया एक साइड का ₹100 है फिर हमने भैरव मंदिर के दर्शन किए और वापसी के लिए निकल गए।।।
यह था हमारी वैष्णो देवी यात्रा का वर्णन आशा करते हैं आपको अच्छा लगा होगा ।
कुछ ध्यान योग्य बातें
1.माता का दरबार 24घंटे खुला रहता ह
2.कटरा से भवन शराब मांसाहार पूरी तरह प्रतिबंधित है
3. कटरा से भवन जाने में 5 से 6 घंटे का समय लगता है
4.ज्यादा खाने पीने का सामान ना लेकर जाए पूरे रास्ते में उपलब्ध है
5.यात्रा परची के बिना कोई भी यात्री बाणगंगा चेक पोस्ट पार नहीं कर सकता पर्ची लेने के 6 घंटे के अंदर बाणगंगा चेक पोस्ट पार करना अनिवार्य है यह नियम यात्रियों की सुरक्षा के लिए श्राइन बोर्ड के द्वारा बनाए गए हैं इन नियमों का पालन अवश्य करें
6. कटरा से सांझी छत तक जाने के लिए हेलीकॉप्टर की सुविधा भी है ज्यादा जानकारी के लिए आप श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड पर विजिट कर सकते हैं
7. श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की तरफ से जम्मू कटरा अर्ध कुमारी और भवन के नजदीक रहने की अच्छी व्यवस्था की गई है आप श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड से ऑनलाइन रूम बुुुुक कर सकते हैं
मां वैष्णो देवी सबकी मुरादें पूरी करें बोल सांचे दरबार की जय
जय माता दी
अन्य यात्रा वर्णन के लिए आप मेरी यादगार यात्रा पर विजिट कर सकते हैं






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